गर्भावस्था

गर्भावस्था एक ऐसा शब्द है जो केवल महिलाओं को ही नहीं, पूरे परिवार को ख़ुशी देता है। गर्भावस्था को समझे तो मतलब होगा गर्भ की अवस्था, इस अवधि के लिए एक शुक्राणु और अंडा मिलकर भ्रूण बनता है जो गर्भावस्था का आरंभ करता है। धीरे-धीरे भ्रूण एक शिशु का रूप ले लेता है।

जो महिला पहली बार माँ बनने वाली होती है, उन्हें ज्ञात नहीं की किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए और क्या-क्या करना चाहिए। कई महिलाओं की तो यह दुविधा भी होती है कि वह प्रेगेंट है या नही? ऐसे ही ना जाने कितने सवालों के जवाब को ढूढती हैं, उन्ही के सब सवालों के जवाब इस आर्टिकल में मौजूद है।

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गर्भावस्था के लक्षण

मासिक धर्म- सबसे अहम लक्षण मासिक धर्म का बंद होना है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि महिला के गर्भाश्य में अंडा और शुक्राणु मिलकर भ्रूण तैयार करते हैं।

सांस लेने में भारीपन महसूस करना- महिला को गर्भावस्था के शुरूआत में सांस लेने वैसे ही भारीपन लगेगा, जैसा सीढि़यां चढ़ाने पर लगता है।ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट में पल रहे भ्रूण को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो आपके द्वारा लेता है। यह भावना आपको पुरे गर्भावस्था के दौरान रहती है।

स्तानों में भारीपन का महसूस होना- गर्भावस्था के शुरूआती दिनों के दौरान स्तानों में भारीपन और उनके आकार में परिवर्तन नज़र आएगा। निपल्सत के आसपास के हिस्से जिसे ‘एरोला’ कहा जाता है उसमें अधिक कालापन होना और स्तानों की नसे फूल जाती है।

थकान महसूस होना- प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोन्स में बदलाव होने के कारण शरीर थक-सा जाता है। कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी के शुरूआती तीन महीनों में सबसे अधिक थकान महसूस होती है। समय के साथ-साथ भ्रूण के परिपक्व होने पर उनकी दिक्कतें बढ़ाने लग जाती है।

मतली- अधिकतर महिलाओं को गर्भावस्था‍ के शुरूआती दिनों से लेकर 6 महीने तक सुबह मतली होने की सभावना सबसे अधिक नज़र आती है। कई महिलाओं को तीनों समय सुबह, दोपहर और रात के दौरान भी मतली हो सकती है ऐसा उनके शरीर में होने वाले बदलावों के वजह से हो सकता है। मतली की दिक्केत प्रेग्नेंसी के 6 महीने के बाद कम होने लग जाती है। गर्भावस्था के समय ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो आसानी से पचा सकें।

अधिक पेशाब का आना-गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में जैसे-जैसे गर्भाश्य बड़ा होता है तो मूत्राशय पर दबाव डालता है और पेशाब बार-बार आता है।

सिरदर्द-गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में शरीर के हार्मोन्स में परिर्वतन आने के कारण सिरदर्द होता है।

पीठदर्द-यदि आपको कभी भी पीठ दर्द जैसी शिकायत नहीं रही है और अचानक से आजकल पीठ में हल्का -हल्का दर्द महसूस होता है ऐसा आपकी गर्भावस्थाल के कारण हो रहा है।

ऐंठन-यदि आप अपने पेट में ऐंठन महसूस करती है तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपके गर्भाश्य में बच्चें का आकार बढ़ने से नसों पर खिंचाव होता है।

खाने के प्रति अरूचि-गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओं को खट्टे खाने की इच्छा होती है और सादे भोजन में अरूचि होने लगती है।

कब्ज़-डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान महिला को कई आयरन और कैल्शियम की दवाई देते है जिस कारण कब्ज़ की शिकायत रहती है। कब्ज़ की समस्या वैसे भी गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव के कारण भी हो सकती है।

स्वभाव बदलना-गर्भावस्था के दौरान महिला का स्वभाव पल भर में बदलता रहता है। कभी बेहद खुश तो कभी अचानक से स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। प्रेग्नेंसी के शुरूआती में मूड स्विंग्स होना आम बात है।

ब्लड़ स्पॉंट-यदि आपके पीरियडस के दिन नजदीक है और आप गर्भधारण कर लेती है तो ऐसा मुमकिन है कि कभी-कभी आपको ब्लड स्पॉधटिंग नज़र आ सकती है। यह सामान्य ब्लड स्पॉट से काफी हल्का होता है, इसको इम्प्लांटेशन ब्लुडिंग कहते हैं।

मेडिकवर फर्टिलिटी एक अच्छा विकल्प है।

मेडिकवर फर्टिलिटी यूरोप के सर्वश्रेष्ठ फर्टिलिटी क्लीनिकों में से है। यहाँ आधुनिक उपकरणों से जाँच की प्रक्रिया की जाती है और डॉक्टर पूरी जाँच व टेस्ट के बाद ही इलाज करते है, जिसमें वह पूर्ण रूप से सक्षम हैं। साथ ही मेडिकवर फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाती है।

मेडिकवर फर्टिलिटी में आईयूआई, आईवीएफ, आईसीएसआई आदि के कई सफल ट्रीटमेंट किए हैं जिनसे कई लोगों को माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ है। यदि किसी युगल को नि: संतानता की समस्या है तो इस विषय से सबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इस नंबर पर +917862-800-700 संपर्क कर सकते हैं।

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