फर्टिलिटी योग

इंसान अपनी ज़िन्दगी में एक खुशहाल जीवन की आशा करता है। जीवन में सुख संतान से होता है लेकिन दुनिया में कई लोग है जिनको संतान सुख नहीं मिल पाता और उसका कारण है महिला या पुरुष के अंदर फर्टिलिटी की समस्या।

बदलते लाइफस्टाइल के साथ व्यक्ति अपनी देखभाल के लिए समय नहीं निकाल पाता है। जिसके कारण उसे कई समस्या होती है। अन्य समस्याओं के साथ प्रजनन (fertility) का समाधान योग है।

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फर्टिलिटी योग

फर्टिलिटी योग कौन-से है?

  • अनुलोम विलोम- यह मानसिक समस्याओं जैसे अवसाद, चिंता, तनाव, इत्यादि को ठीक करने में मदद करता है। सांस लेने से संबंधित समस्याओं जैसे ब्रोंकाइटिस (Bronchitis), अस्थमाया दमा आदि के लिए सबसे अधिक फायदेमंद है। प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करता है। बिना किसी संदेह के अनुलोम विलोम सभी के लिए सबसे उपयुक्त प्राणायाम है। प्रजनन से जुड़ी किसी भी समस्या में इस योग को करना फायदेमंद है।
  • पश्चिमोत्तानासन- यह योग बैठकर किया जाता है, इस योग की मदद से फर्टिलिटी को बढ़ाया जा सकता है। इस आसन के अभ्यास से आपके पीठ दर्द की समस्या दूर होती है, साथ ही पेट से सम्बंधित सारी समस्याएं भी ठीक होती है। पश्चिमोत्तानासन आसन रोज़ करने से तनाव, सिर दर्द, अनिंद्रा जैसी समस्याएं से छुटकारा मिलता है। यह आसन महिला के गर्भधारण करने वाले प्रमुख अंग जैसे अंडाशय और गर्भाश्य को मज़बूत बनाता है।
  • हस्तपदासन- इस आसन में अपने पैर को हाथों से छूने के लिए आगे की ओर झुकना होगा। यह पीठ की सभी महत्वपूर्ण मांसपेशियों को फैलाता है और इस योग को करने से श्रोणि क्षेत्र (pelvic area) और नर्वस सिस्टम (nervous system) में रक्त की आपूर्ति में सुधार होता है। इस योग में झुकना पेट क्षेत्र से तनाव से छुटकारा दिलाने में मदद करता है और रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनाता है।
  • जानु शीर्षासन- गर्भावस्था के दौरान जानु शीर्षासन बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह आपकी निचली पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है। जब सही तरीके से निष्पादित किया जाता है, तो यह योग मुद्रा बहुत आराम से होती है और निचले हिस्से से तनाव मुक्त करता है। यह प्रभावी रूप से हैमस्ट्रिंग (hamstring) को फैलाता है, जिससे वह बहुत ही उपयुक्त बन जाता है।
  • बधा कोनासाना- यह आसन आपके निजी हिस्से और हिप क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाता है क्योंकि यह आंतरिक जांघों, जननांग और घुटनों को फैलाता है। यह हिप और ग्रोइन (groin) के क्षेत्रों में किसी भी विषाक्त पदार्थ और नकारात्मक ऊर्जा को मुक्त करने में मदद करता है। आपका श्रोणि (pelvic), पेट और पीठ पर रक्त की पूर्ति करता है। जांघों की झुकाव से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या भी बढ़ जाती है। महिलाओं में यह अंडाशय को ठीक से काम करने और अनियमित मासिक ठीक करने के लिए सहायता करता है। यह न केवल प्रजनन स्तर को बढ़ाता है बल्कि गर्भावस्था तक अभ्यास करने पर डिलीवरी को आसान करता है।
  • विपरीत करणी- यह स्थिति पीठ दर्द से राहत देती है और श्रोणि क्षेत्र (pelvic area) में रक्त के प्रवाह में सुधार करती है। यह मुद्रा गर्दन, सामने की धड़ और पैरों के पीछे फैली हुई है। यह आसन आपके पंजो और थके हुए पैरों को आराम दिलाता है। एक सभ्य प्रजनन दर के साथ आप यौन के बाद इस मुद्रा में आराम करके गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं।
  • भ्रामरी प्राणायाम- शरीर के तनाव, क्रोध और चिंता से राहत दिलाने के लिए मधुमक्खी की तरह सांस लेना इस आसन का भाग है। शरीर व् दिमाग को शांत करता है और गर्भधारण की संभावना को बढ़ाता है। भ्रामरी प्राणायाम के हमिंग कंपन (Humming vibration)से पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary gland) सक्रिय होती है,जो शरीर में प्रमुख ग्रंथियों में से एक है। यह मास्टर ग्रंथि है जो शरीर में सभी प्रमुख ग्रंथियों को नियंत्रित करती है, जिनमें यौन हार्मोन होते हैं।
  • शवासाना- शवासाना या शव मुद्रा योग निद्रा नामक एक सचेत योगी नींद को प्रेरित करने में मददगार है। यह शरीर और दिमाग में संतुलन प्राप्त करने में सहायता करता है। यह मुद्रा महिलाओं के लिए अन्य प्रजनन योग के बीच बहुत ही सरल है, क्योंकि यह दिमाग की स्थिति को ऊपर उठाने और उनके दृष्टिकोण में एक आशावादी बनाने में मदद करता है। मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह ध्यान सीधे प्रजनन के स्तर में सुधार नहीं करती है, लेकिन यह निश्चित रूप से आपको मन से शांत रखती है और जो परिवार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए बहुत उपयोगी है। प्रजनन क्षमता के लिए सभी योगों को समाप्त करने के बाद शवासाना करें।
इन आसन के बाद कुछ अन्य आसनों का भी प्रयोग करके अपनी फर्टिलिटी की समस्या से राहत पा सकते हैं-

भुजंगासन- यह आसन फर्टिलिटी में वृद्धि करने के लिए बहुत ही अच्छा होता है। भुजंगासन रोज़ाना करने से शरीर में रक्त संचार अच्छे से होता है। जिसके कारण अंडाशय (Ovary) और गर्भाश्य (uterus) दोनों में रक्त बहुत ही अच्छे से पहुंच पाता है। शरीर के हार्मोन्स का संतुलन बनाने में भीमददगार है साथ ही इस आसन को करने से शरीर की थकान और तनाव से राहत मिलती है।

पादहस्तासन- इस आसन को नियमित रूप से करने पर इनफर्टिलिटी की समस्या दूर होती है। इस आसन की मदद से गर्भाश्य, मूत्र-प्रणाली और बांझपन जैसी समस्या का समाधान पाया जा सकता है। यह पेट में होने वाली कब्ज की शिकायत को दूर करने में भी सहायक है।

सेतु बंधासन- इस आसन को करने से आपके श्रोणि क्षेत्र (pelvic area) खुल जाते है और पीठ की मासपेशियों को मज़बूत बनाता है। यह आसन लेटकर किया जाता है। इस आसनकी मदद से तनाव, चिंता और डिप्रेशन को दूर किया जा सकता है जिससे आपके शरीर में फुर्ती सी रहेगी। साथ ही यह आपके पाचन क्रिया को ठीक रखता है। यह आसन महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म व रजोनिवृति जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।

पद्मासन- यह आसन बैठ कर किया जाता है जो हमारे मन को शांत कर सभी चिंताओं से मुक्त करता है। इस आसन को नियमित रूप से करने से पाचन क्रिया अच्छी रहती है साथ ही इनफर्टिलिटी की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है।

इन आसनों की मदद से आप अपनी किसी भी समस्या का समाधान कर एक सुखी जीवन जी सकते हैं।

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