आई सी एस आई क्या है?

क्या आप आईसीएसआई ट्रीटमैंट से वाकिफ़ है?

दुनिया में सबसे बड़ा सुख संतान का माना जाता है। उसी तरह दुनिया की रीत और अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए शिशु की आवश्कता हर इंसान को होती है। माता-पिता के लिए औलाद का सुख अपने जीवन में जन्नत से कम नहीं होता है. लेकिन, वास्तव में दुनिया में कई ऐसे भी जोड़े है जो मातृ-पितृ के सुख से आज भी वंचित हैं। दिल में आशा के कई भाव लिए न जाने कितने ट्रीटमैंट (उपचार) करवाएं होंगे परंतु कभी क्या आपने ICSI (आई सी एस आई) ट्रीटमैंट का सहारा लिया है?

icsi in hindi
आई सी एस आई क्या है ?

आख़िरकार आई सी एस आई (ICSI) क्या है?

आई सी एस आई का अर्थ इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन होता है। आई सी एस आई ट्रीटमैंट ज्यादातर मामलों में पुरुषों के अंदर मौजूद बांझपन के कारणों का सफल इलाज करने के लिए सक्षम माना जाता है। अब बात करते है, पुरुषों के अंदर बांझपन के क्या कारण होते हैं-

  • शुक्राणुओं की संख्या में अधिक कमी की समस्या। (LOW SPERM COUNT)
  • सीमेन( शुक्र) में शुक्राणुओं की उपस्थिति न होना।(AZOOSPERMIA)
  • शुक्राणुओं की गति की समस्या। (LOW SPERM MOTILITY)
  • शुक्राणुओं के आकार की समस्या। (POOR SPERM MORPHOLOGY)
  • शुक्राणुओं की गुणवत्ता की समस्या। (LOW QUALITY SPERM)
  • शुक्राणुओं सबंधी कोई अन्य समस्या या आदि।

यदि किसी भी पुरुष को इनमें से कोई-सी भी समस्या हो तो आई सी एस आई (ICSI) के ज़रिए उस व्यक्ति को पिता बनने का सुख प्राप्त करवाया जा सकता है।

आईसीएसआई ट्रीटमैंट (ICSI Treatment in Hindi)

इस प्रकिया का किस तरह से प्रयोग किया जाता है विस्तार से जाने ।
  • सबसे पहले आई सी एस आई ट्रीटमैंट की प्रक्रिया में पुरुष का सीमेन लिया जाता है।
  • शुक्र (स्पर्म) लेने के बाद उसे -196 डिग्री लिक्विड नाइट्रोजन में फ्रीज़ कर लिया जाता है। शुक्र फ्रीज़ इसलिए किया जाता है क्योंकि जिन पुरुषों में शुक्राणु की अधिक कमी होती है, ताकि उनसे सीमेन दुबारा लेने में दिक्कतों का सामना ना करना पड़ें।
  • फिर शुक्र को आगे जाँच के लिए भेजा जाता है। जाँच की प्रक्रिया के दौरान शुक्र (सीमेन) को अच्छी तरह से मशीन के ज़रिए धोया जाता है।
  • सीमेन धोने के बाद उसमें से सक्रिय (अच्छे) व असक्रिय (बेकार) शुक्राणुओं को अलग कर दिया जाता है। फिर सक्रिय(अच्छे) शुक्राणुओं में से सबसे अधिक सक्रिय(अच्छे) शुक्राणु का चयन करके, आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
  • एक प्लेट जिसे पेट्री डिश कहा जाता है उसमें महिला के बाहर निकाले हुए अंडे में इंजेक्शन की मदद से चयन किया गया सक्रिय(अच्छे) शुक्राणु को इंजेक्ट कर दिया जाता है।
  • इस प्रक्रिया के बाद अंडे (एग) को निगरानी में रखा जाता है और भ्रूण (एम्ब्र्यो) तैयार होने तक का इंतजार किया जाता है।
  • भ्रूण लगभग 3 दिन में तैयार हो जाता है। इसे फिर कैथिटर (CATHETER) जो एक विशेष लचकदार नली की तरह दिखता है, उसकी मदद से महिला के गर्भाशय के भीतर रख दिया जाता है। आई वी एफ + आई सी एस आई की पूरी प्रक्रिया में 2.5 से 3 सप्ताह लग जाते हैं।

कई स्थिति में देखा गया कि ब्लास्टोसिस्ट (BLASTOCYST) ज्यादा मात्रा में सफल उपचार रहा है. जिसमें भ्रूण को 3 दिन की बजाए 5 दिन तक निगरानी में रखने के बाद महिला के गर्भाशय के भीतर रखा जाता है। इस स्थिति में माँ बनने की सम्भावना अधिक भी बढ़ जाती है।

जानिए मेडीकवर फर्टिलिटी किस तरह आपकी आई सी एस आई द्वारा सहायता करने में सक्षम है?

आई सी एस आई ट्रीटमैंट के लिए भारत में कई संस्थाएं मौजूद हैं। इन संस्थाओं में अब मेडीकवर फर्टिलिटी भी शामिल हो चुकी है। यह यूरोप के सर्वश्रेष्ठ फर्टिलिटी क्लीनिकों में से एक है। साथ ही आधुनिक उपकरणों से जाँच की प्रक्रिया में मेडीकवर फर्टिलिटी को श्रेष्ठता प्राप्त है।

मेडीकवर फर्टिलिटी ने आई सी एस आई के ज़रिए कई सफल ट्रीटमैंट किए हैं जिनसे कई लोगों को माता-पिता बनने का सुख प्राप्त हुआ है। यहां के डॉक्टर सभी तरह के टेस्ट के दौरान आपका संयोग देते हैं। साथ ही मेडीकवर फर्टिलिटी में आपकी जानकारी पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाती है।

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